Neeva Search Engine – नीवा सर्च इंजन क्या है क्या गूगल को टक्कर दे सकता है पूरी जानकारी हिन्दी में।

नीवा सर्च इंजन क्या है: पिछले कुछ वर्षों से गूगल की सर्च इंजन ने इन्टरनेट में अपना दबदबा बनाकर रखा है। ऐसे बहुत से नए सर्च इंजिन्स आये और गये लेकिन किसी ने भी गूगल को अच्छी चुनौती देने में सक्षम नहीं हुए। फ़िर चाहे वो माइक्रोसॉफ्ट बिंग हो, या डकडकगो हो सभी गूगल के सामने हार गए। अब हाल ही में ही नयी नीवा सर्च इंजन को लांच किया गया है जो की माना जा रहा है की गूगल को अच्छी चुनौती देने में सक्षम हो सकता है।

और ऐसे में बहुत से लोगों को नीवा सर्च इंजन के विषय में पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए मैंने सोचा की क्यूँ न में आप लोगों को इस नए सर्च इंजन के विषय में जानकारी प्रदान करु। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की इस नए नीवा को श्रीधर रामास्वामी और उनके टीम के लिए विकशित किया गया है जो की खुद पहले एक एक्स-गूगल कंपनी में काम कर चुके हैं। तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और इस नए सर्च इंजन के बारे में और अधिक जानकारी हिन्दी में प्राप्त करते हैं।

नीवा सर्च इंजन क्या है:

नीवा एक सर्च इंजन है जो की दुसरे सर्च इंजिन्स के तरह ही इन्टरनेट पर यूजर के द्वारा सर्च किये गए इनफार्मेशन को खोजता है, और इसके साथ ये पर्सनल फाइल्स जैसे की: इमेल्स और दुसरे डाक्यूमेंट्स को भी खोजता है।

लेकिन इसकी जो खासियत है वो ये की इसमें आपको किसी भी प्रकार की अद्वेर्तिसेमेन्ट्स दिखाई नहीं पड़ेगी और साथ में ये आपके पर्सनल डाटा को भी कलेक्ट नहीं करता है जैसे गूगल करता है। वहीँ ये सर्विस सब्सक्रिप्शन बेस्ड होने वाली है जिसमें की यूजर को इस नीवा सर्च इंजन का इस्तमाल करने के लिए कुछ पैसों का भुकतान करना पड़ सकता है।

नीवा को पूरी तरह से स्क्रैच से तैयार नहीं किया गया है। इसकी सर्च रैंकिंग्स को पॉवेरेड किया गया है माइक्रोसॉफ्ट बिंग के द्वारा, वहीँ वेअथेर इनफार्मेशन को लिया गया है वेअथेर.कॉम से, स्टॉक डाटा ली गयी है इंटरिनिओ से, और वहीँ मैप्स है एप्पल से।

जब यूजर लिंक करते हैं उनके गूगल, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस या ड्रॉपबॉक्स अकाउंट को, तब नीवा खोजने लगती है पर्सनल फाइल्स के साथ-साथ पब्लिक इंटरनेट को भी सही जवाब पाने के लिए।

और चूँकि इसे पहले से पता है की कौन से लोग आपके कॉन्टेक्ट्स में मेह्जुद हैं, किन रिटेलर्स से आपने चीज़ें आर्डर करी हैं, और वो कौन से ऐसे न्यूज़ पुब्लिकेशन्स हैं जहाँ से की आपको नूस्लेटर्स प्राप्त होता है, इन सभी डाटा के आधार पर नीवा की सर्च रिजल्ट्स आपके लिए ज्यादा पर्सनलाइज्ड होने लगेगी समय के साथ।

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नीवा और गूगल के सर्च इंजन में क्या अंतर है:

नीवा और गूगल के सर्च इंजन में जो सबसे बड़ा अंतर है वो ये की नीवा में आपको कभी भी एड्स देखने के लिए नहीं मिलेंगे। यूँ कहे तो ये सर्च इंजन पूरी तरह से एड्स फ्री होने वाला है ऐसा इसके फाउंडर श्रीधर रामास्वामी जी का कहना है।

यह सर्विस असल में एडवरटाइजिंग फ्री होने वाला है और इसके साथ ये सब्सक्रिप्शन-सपोर्टेड भी होंगे। वहीँ ये यूजर को ट्रैक नहीं करेगी और काफी हद तक ये पर्सनलाइज्ड भी होगी। वहीँ सुनने में मिला है की यह पेर्सनलिज़तिओन वाली फीचर को बिना किसी प्रकार के डाटा माइनिंग के ही किया जायेगा।

नीवा में किसी भी प्रकार का बेसिक काम नहीं होगा, यानि की इसे फिर से रेवेंट नहीं किया जायेगा न ही इसकी सर्च क्ष्य्मता में किसी प्रकार का बदलाव देखा जायेगा। इसे चलाने के लिए पहले से मेह्जुद कंटेंट और डाटा सोर्सेज का उपयोग किया जायेगा। जैसे की: बिंग सर्च रिजल्ट्स, एप्पल मैप्स, वेअथेर और दुसरे डाटा सोर्सेज। नीवा आपके पर्सनल फाइल्स जैसे की ईमेल और “लोकल” डाक्यूमेंट्स को भी सर्च करेगा वेब के साथ।

जहाँ गूगल अपनी बहुत से जगह एड्स को प्रदान करता है उसके टॉप ऑफ़ सर्च रिजल्ट्स की, इससे होता ये की अच्छे कंटेंट्स को जानबूझकर पीछे कर दिया जाता है जिससे की एड्स को प्लेस किया जा सके। इसके वजह से छोटे स्मार्टफोन स्क्रीन्स में यूजर को काफी तकलीफ सहनी पड़ती है।

नीवा सर्च इंजन शुरू करने के पीछे का कारण क्या है:

रामास्वामी जिन्होंने की इस नयी सर्च इंजन “नीवा” की शुरुवात करी है, और उनके अनुसार वो गूगल के तोर तरीकों से परेशान आ चुके थे, जिस कारण उन्हें अपनी अच्छी खासी नौकरी छोडनी पड़ी।

गूगल अपने ग्रोथ को मेन्टेन करने के लिए, अपने एम्प्लाइज से काफी उम्मीद करता है, जिससे की रामास्वामी जी को काम करने में अच्छा नहीं लगने लगा था। वहीँ इसके अलावा भी अब गूगल धीरे-धीरे महत्वपूर्ण सर्च रिजल्ट्स को पीछे धकेलने लगा था जिससे की वो टॉप पेजेज में ज्यादा अद्वेर्तिसेमेन्ट्स को जगह दे सके। इसके अलावा भी यूजर की प्राइवेसी को लेकर भी उन्हें गूगल का काम सही नहीं लगा।

रामास्वामी के अनुसार, सर्च रिजल्ट्स की क्वालिटी और उपयोगिपन को धीरे-धीरे कोम्प्रोमाईज़ किया जाने अलग था और ज्यादा फोकस एड्स रेवेनुए पर दिया जाने अलग था। वहीँ उनकी इस बात से काफी लोग सहमत भी होने वाले हैं। इससे उन्हें लगा की यूजर के साथ ऐसा कर गूगल सही नहीं कर रहा है, जिसके चलते लोगों को भारी नुकशान उठाना पड़ रहा है। बस ऐसे में उन्हें एक नयी सर्च इंजन बनाने के आईडिया आया जो की यूजर को सबसे जल्द और सबसे बढ़िया सर्च रिजल्ट्स निकाल कर प्रदान करे।

क्या नीवा की सर्विस फ्री होंगी इस्तमाल करने के लिए:

जी हाँ शुरुवात में नीवा की सर्विस को फ्री किया जायेगा, लेकिन बाद में इस सर्विस के लिए आपको एक छोटी से फीस जो की होगी $10 प्रतिमाह का भुकतान करना पड़ सकता है। लेकिन जैसे-जैसे ज्यादा लोग इस सर्विस का उपयोग करने लगेंगे तब इसकी मूल्य में भी काफ़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

इसे भी पढ़ें: वेब होस्टिंग क्या है और इसका क्या यूज़ है पूरी जानकारी हिन्दी में।

क्या नीवा आगे चलकर सफल बन सकता है:

कुछ जानकारों का मानना है की ऐसी सब्सक्रिप्शन मॉडल कभी भी सफल नहीं हुए हैं, ऐसा इसलिए क्यूंकि वो ज्यादा यूजर को अपनी और आकर्षित करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। इसका मूल कारण है की उनके जैसे ही सर्विस को पहले से उनके कॉम्पिटिटर मुफ्त में प्रदान कर रहे हैं, जैसे की गूगल।

जहाँ माइक्रोसॉफ्ट की इतनी बड़ी रिसोर्स के होने के वाबजूद भी बिंग आगे चलकर उतना पॉपुलर नहीं हो पाया, वहीँ नीवा का ऐसे में पॉपुलर होने की उम्मीद काफी कम नज़र आ रही है। अब समय ही बताएगा की नीवा आगे चलाकर कितना सफल हो पा रहा है।

नीवा ने अब तक कितने पैसे इकठ्ठा कर लिए हैं:

नीवा जो की अभी के नयी सर्च इंजन है उसने अभी तक $37.5 मिलियन तक की राशी इकठ्ठा कर ली है। वहीँ उनके पास अभी के समय में केवल 25 एम्प्लाइज ही मेह्जुद हैं।

नीवा, जो की अपनी शुरुवाती इंवेस्टमेंट्स ली हुई है ग्रीलॉक, सेकोईअ कैपिटल से – ये दोनों भी अर्ली इन्वेस्टर रह चुके हैं गूगल की उसकी शुरुवाती दिनों में।

नीवा फाउंडेशन के फ्यूचर प्लान क्या है:

नीवा और उसके फाउंडर्स के बहुत सारे फ्यूचर प्लान्स है जिन्हें की उन्हें सही रूप से एक्सेक्यूटे करना होगा, यदि वो चाहते हैं इस केटेगरी में पॉपुलर होना चाहते हैं तब। ऐसा करने के लिए, नीवा को सबसे बढ़िया सर्च रिजल्ट्स की क्वालिटी प्रदान करनी होगी जैसे की वो प्रॉमिस कर रहे हैं।

वहीँ उसके साथ उन्हें कुछ काफ़ी आकर्षक फीचर्स भी लानी होगी अपने सर्च इंजन में जो की अभी के समय में मेह्जुद न हो गूगल में। इसके साथ साथ उन्हें एक लॉयल फोल्लोविंग भी बनानी होगी टेक्नोलॉजी सर्च इन्फ्लुएंसर्स की जो की उनके इस नए सर्च इंजन को प्रमोट करें। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनके इस कार्य को पहुँचाया जा सकता है।

आख़िर में, उन्हें अपने इस सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल के बेनिफिट्स को सही तरीके से बेचना होगा लोगों को जिससे की वो उनके सर्विस का उपयोग कर सकें। लेकिन यह करना उतना आसान नहीं होगा। अभी के समय में, नीवा के पास उतनी बड़ी मार्किट शेयर मेह्जुद नहीं है सफल होने के लिए, इसलिए उसे अपनी यूजर बेस को डेवेलोप करना होगा जिससे की वो खुद फिनांकिअल्ली आत्मनिर्भर बन सके। इससे वो लॉन्ग टर्म में अपने लिए एक मार्किट शेयर कैप्चर कर सकें।

इसे भी पढ़ें: डार्क वेब क्या है और यह कैसे काम करता है पूरी जानकारी हिन्दी में।

आज आपने क्या सीखे: मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख नीवा सर्च इंजन क्या है जरुर पसंद आई होगी। मेरा हमेशा से यही कोशिश रहती है की रीडर्स को नीवा इन हिन्दी के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे साइट्स या इंटरनेट में उस आर्टिकल के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है।

इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी इनफार्मेशन भी मिल जायेंगे। यदि आपके मन में इस आर्टिकल को लेकर कोई भी डॉब्टस या प्रॉब्लम हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीच कमैंट्स लिख सकते हैं।

यदि आपको यह पोस्ट क्या नीवा सर्च इंजन गूगल से बेहतर है पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को सोशल नेटवर्क्स जैसे कि: फेसबुक, ट्विटर और दुसरे सोशल मीडिया साइट्स पर शेयर कीजिये।

Sagar Biswashttps://24hindi.in
Sagar Biswas is the Chief Seo Expert and the Founder of ‘24Hindi’. He has a very deep interest in all current affairs topics whatsoever. Well, he is the power of our team and he lives in Surat. Who loves to be a self dependent person.

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