SEO – एसईओ क्या है और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन कैसे करते हैं?

एसईओ क्या है: और यह ब्लॉग के लिए क्यूँ जरुरी है? ये सवाल अक्सर बहुत से नए ब्लोग्गेर्स को बहुत परेशान करता है। आज के इस डिजिटल युग में अगर आपको लोगों के सामने आना है तब ऑनलाइन ही वो एकमात्र जरिया है। जहाँ आप एक साथ करोड़ों लोगों के सामने उपस्तिथ हो सकते हैं।

यहाँ चाहे तो, आप खुद वीडियो के माध्यम से उपस्तिथ हो सकते हैं या फिर अपने कंटेंट्स के द्वारा लोगों तक अपनी बात पंहुचा सकते हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको सर्च इंजिन्स के फर्स्ट पेजेज में आना होगा, क्यूंकि यही वो पेजेज हैं जिन्हें विसिटोर्स ज्यादा पसंद करते हैं और ट्रस्ट भी करते हैं।

लेकिन यहाँ तक पहुँचना उतना आसान काम नहीं है। क्यूंकि इसके लिए आपको अपने आर्टिकल्स का सही ढंग से एसईओ करना होगा। मतलब की उन्हें सही तरीके से ऑप्टीमाइज़्ड करना होगा, जिससे वो सर्च इंजन में रैंक हो सके। और इसकी प्रक्रिया को ही एसईओ कहते हैं। वही आज के इस आर्टिकल में हम एसईओ किसे कहते हैं। और कैसे करे के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे।

यूँ कहे तो ब्लॉग्गिंग की जान है एसईओ। ऐसा इसलिए क्यूंकि आप चाहे तो कितनी भी अच्छी आर्टिकल लिख लें, अगर आपकी आर्टिकल ठीक तरीके से रैंक नहीं हुई है तब उसमें ट्रैफिक आने की संभावनाएं न के बराबर होती है। ऐसे में राइटर का सारा मेहनत पानी में चला जाता है।

इसलिए अगर आप ब्लॉग्गिंग को लेकर सीरियस हैं, तब तो आपको एसईओ टुटोरिअल के विषय में जानकारी जरुर रखनी चाहिए। ऐसा करने से ये बाद में आपके बहुत काम में आने वाली हैं। एसईओ का वैसे कोई रूल नहीं होते हैं, बल्कि ये कुछ गूगल अल्गोरिथ्म्स के ऊपर आधारित हैं और वो निरंतर बदलता रहता है।

एक बात का जरुर ध्यान दें, की यदि कोई आपसे कहे की वो एक बड़ा एसईओ एक्सपर्ट इन हिंदी है तब उसे कभी यकीन न करें क्यूंकि आजतक कोई भी एसईओ पर मास्टरी नहीं कर पाया है।

ये चीज़ ही ऐसी है और समय के साथ साथ और जरुरत के हिसाब से ये बदलता रहता है। लेकिन फिर भी गूगल एसईओ गाइड के कुछ फंडामेंटल्स हैं जो की हमेशा समान होते हैं। इसलिए ये जरुरी है की ब्लोग्गेर्स हमेशा खुद को नए एसईओ तकनीक से अपडेटेड रहें।

इससे आपको मार्किट में चल रहे ट्रेंड्स के बारे में पता होगी, जिससे आप भी अपने आर्टिकल्स में जरुरी बदलाव ला सकते हैं जो की बाद में आपको रैंक करने में मदद करेंगी।

आज हम जानेंगे एसईओ की जानकारी हिंदी में या एसईओ क्या होता है? दोस्तों पिछली लेख में हमने जाना था की क्या ऑनलाइन पैसे कमाना आसान है? ब्लॉग्गिंग भी एक ऐसा प्लेटफार्म है जो आपको ऑनलाइन से पैसे कमाने का जरिया देता है।

24Hindi.in में मैंने आपको ब्लॉग्गिंग से रिलेटेड बहुत सी जानकारियां दी हैं जो आपके ब्लॉग को सफल बनाने के काफी काम आ सकती है।

लेकिन उन सभी चीजों से भी ज्यादा जरुरी चीज जो ब्लॉग्गिंग के करियर में सफलता पाने के लिए बहुत ही माइने रखती है वो है एसईओ, आज हम जानेगे की सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन क्या है और ये ब्लॉग के लिए क्यों जरुरी है?

एसईओ क्या है:

जैसे मान लीजिये हम गूगल में जाकर कुछ भी कीवर्ड टाइप कर सर्च करते हैं, तो उस कीवर्ड से रिलेटेड जितने भी कंटेंट्स होते हैं वो आपको गूगल दिखा देता है। ये कंटेंट्स जो हमे नज़र आते हैं वो सभी अलग अलग ब्लॉग से आते हैं।

जो रिजल्ट हमे सबसे ऊपर दिखाई देता है वो गूगल में नंबर.1 रैंक पर है, तभी वो सबसे ऊपर अपनी जगह बनाये रखा है। नंबर.1 पर है मतलब की उस ब्लॉग में एसईओ का बहुत अच्छी तरीके से इस्तेमाल किया गया है, जिससे की उसमे ज्यादा विसिटोर्स आते है और इसी वजह से वो ब्लॉग मसहुर हो गया है।

एसईओ हमारे ब्लॉग को गूगल में नंबर.1 रैंक पर लाने के लिए सहायता करता है। ये एक तकनीक है, जो आपके वेबसाइट को सर्च इंजन के सर्च रिजल्ट पर सबसे ऊपर रख, उसमे विसिटोर्स की संख्या को बढाती है।

आपका वेबसाइट सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर हो तो, इंटरनेट यूजर सबसे पहले आपके साइट में ही विजिट करेंगे जिससे, आपके साइट में ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक होने की संभावना बढ़ जाती है और आपकी इनकम भी अच्छी होने लगती है। अपने वेबसाइट पे आर्गेनिक ट्रैफिक बढ़ाने के लिए एसईओ का इस्तेमाल करना बहुत जरुरी है।

एसईओ का फुल फॉर्म क्या है:

एसईओ का फुल फॉर्म है सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन।

एसईओ ब्लॉग के लिए क्यों जरुरी है:

आप ने जान लिया की एसईओ क्या है, चलिए अब जानते हैं की ये एसईओ के लिए क्यूँ जरुरी है। अपने वेबसाइट को लोगों तक पंहुचाने के लिए हम एसईओ का इस्तेमाल करते हैं।

मान लीजिये मैंने एक वेबसाइट बना लिया उसमे अच्छे अच्छे हाई क्वालिटी कंटेंट्स भी पब्लिश कर दिया लेकिन अगर मैंने एसईओ का इस्तेमाल नहीं किया तो मेरा वेबसाइट लोगों तक नहीं पहुँच पायेगा, और मेरे वेबसाइट बनाने का भी कोई फायेदा नहीं होगा।

अगर हम एसईओ का इस्तेमाल नहीं करेंगे, तो जब भी कोई यूजर कोई कीवर्ड सर्च करेगा तो, आपके वेबसाइट में उस कीवर्ड से रिलेटेड अगर कोई कंटेंट मौजूद है तो यूजर आपके वेबसाइट को एक्सेस नहीं कर पायेगा, क्यूंकि सर्च इंजन हमारे साइट को ढूंढ नहीं पायेगा ना ही हमारे वेबसाइट के कंटेंट को अपने डेटाबेस पर स्टोर कर पायेगा, जिससे आपके वेबसाइट में ट्रैफिक होना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा।

एसईओ को समझना इतना भी मुश्किल नहीं है अगर आपने इसे सिख लिए तो अपने ब्लॉग को बहुत ही बेहतर बना सकते हैं और उसकी वैल्यू सर्च इंजन में बढ़ा सकते हैं।

एसईओ को सिख लेने के बाद जब उसका इस्तेमाल अपने ब्लॉग के लिए करते हैं तो आपको उसका रिजल्ट तुरंत नहीं दिखेगा, इसके लिए आपको धैर्य रख कर अपना काम करते रहने होगा। क्यूंकि सब्र का फल मीठा होता है। और आपकी मेहनत का रंग आपको जरुर दिखेगा।

जैसे की मैंने पहले ही कह दिया है की कैसे रैंकिंग के लिए और ट्रैफिक के लिए एसईओ करना क्यूँ जरुरी बन जाता है। चलिए आप सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के इम्पोर्टेंस के विषय में और अधिक जानते हैं।

  • ज्यादातर यूजर इंटरनेट में सर्च इंजिन्स का इस्तमाल अपने सवालों के जवाब पाने के लिए करते हैं। ऐसे में वो सर्च इंजन द्वारा दिखाए गए, टॉप रिजल्ट्स को ही ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसे में अगर आप भी लोगों के सामने आना चाहते हैं तब आपको भी एसईओ की मदद लेनी होगी, ब्लॉग को रैंक करने के लिए।
  • एसईओ केवल सर्च इंजिन्स के लिए नहीं है बल्कि अच्छे एसईओ प्रैक्टिसेज के होने से ये यूजर एक्सपीरियंस को बढ़ाने में मदद करता है, और आपके वेबसाइट के उसाबिलिटी को भी बढ़ता है।
  • यूजर से ज्यादातर टॉप रिजल्ट्स को ही ट्रस्ट करते हैं और इससे उस वेबसाइट की ट्रस्ट बढ़ जाती है। इसलिए एसईओ के सन्दर्भ में जानना बहुत जरुरी होता है।
  • एसईओ आपके साइट के सोशल प्रमोशन के लिए भी बहुत जरुरी होता है। क्यूंकि जो लोग आपके साइट को गूगल जैसे: सर्च इंजन में देखते हैं तब वो ज्यादातर उन्हें सोशल मीडिया जैसे: की फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस में शेयर जरुर करते हैं।
  • एसईओ किसी भी साइट के ट्रैफिक को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
  • एसईओ आपको किसी भी कम्पटीशन में जरुर आगे रहने में मदद करता है। उदहारण के लिए अगर दो वेब्सीटेस समान चीज़ें बेच रही हैं, तब जो वेबसाइट एसईओ ऑप्टीमाइज़्ड होती है वो ज्यादा कस्टमर्स अपने और खींचती हैं, और उनकी सेल्स भी बढ़ जाती है वहीँ दूसरी उतना नहीं कर पाती हैं।

इसे भी पढ़े: ब्लॉग्गिंग क्या है और इसमें कैसे काम करके पैसे कमाते है?

टाइप्स ऑफ़ एसईओ इन हिंदी:

एसईओ दो प्रकार के होते हैं एक है ओने पेज एसईओ और दूसरा है ऑफ पेज एसईओ। इन दोने का काम बिलकुल अलग है चलिए हम इनके बारे में भी जान लेते हैं।

  • ओने पेज एसईओ
  • ऑफ पेज एसईओ
  • लोकल एसईओ

1. ओने-पेज एसईओ:

ओने पेज एसईओ का काम आपके ब्लॉग में होता है। इसका मतलब है की अपने वेबसाइट को ठीक तरह से डिज़ाइन करना जो एसईओ फ्रेंडली हो।

एसईओ के रूल को फॉलो कर अपने वेबसाइट में टेम्पलेट का इस्तेमाल करना। अच्छे कंटेंट्स लिखना और उनमे अच्छे कीवर्ड्स का इस्तेमाल करना जो सर्च इंजन में सबसे ज्यादा खोजी जाती है।

कीवर्ड्स का इस्तेमाल पेज में सही जगह करना जैसे: टाइटल, मेटा डिस्क्रिप्शन, कंटेंट में कीवर्ड का इस्तेमाल करना, इससे गूगल को जानने में आसानी होती है की आपका कंटेंट किसके ऊपर लिखा गया है और जल्दी आपके वेबसाइट को गूगल पेज पर रैंक करने में मदद करता है। जिससे आपके ब्लॉग की ट्रैफिक बढती है।

  • ओने पेज एसईओ कैसे करे: यहाँ पर हम कुछ ऐसे टेक्निक्स के बारे में जानेंगे जिनकी मदद से हम अपने ब्लॉग या वेबसाइट को ओने पेज एसईओ अच्छे तरीके से कर सकेंगे।

1. वेबसाइट स्पीड: वेबसाइट स्पीड एक बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी है एसईओ के दृष्टी से। एक सर्वे से पाया गया है, की किसी भी विजिटर ज्यादा से ज्यादा 5 से 6 सेकण्ड्स ही किसी ब्लॉग या वेबसाइट पर रहता है।

अगर वो इसी समय के भीतर नहीं खुला तब वो उसे छोड़ दुसरे में माइग्रेट हो जाता है। और ये बात गूगल के लिए भी लागु होती है क्यूंकि अगर आपका ब्लॉग जल्दी नहीं खुला तब एक नेगेटिव सिग्नल गूगल के पास पहुँच जाता है। की ये ब्लॉग उतनी अच्छी नहीं है या ये ज्यादा फ़ास्ट नहीं है। तो जितना हो सके अपनी साईट की स्पीड अच्छी रखें।

1. यहाँ मैंने कुछ इम्पोर्टेन्ट टिप्स दिए है जिससे आप अपनी ब्लॉग या वेबसाइट की स्पीड फ़ास्ट कर सकते हैं:

  • सिंपल और अट्रैक्टिव थीम का इस्तमाल करें।
  • ज्यादा प्लगिन्स का इस्तेमाल न करें।
  • इमेज का साइज कम-से-कम रखें।
  • डब्लू 3 टोटल कैश और डब्लू पी सुपर कैश प्लगिन्स का इस्तमाल करें।

2. वेबसाइट की नेविगेशन: अपनी ब्लॉग या वेबसाइट में इधर उधर जाना आसान होना चाहिए। जिससे कोई भी विजिटर और गूगल को एक पेज से दूसरे पेज में जाने में कोई परेशानी ना हो।

3. टाइटल टैग: अपनी वेबसाइट में टाइटल टैग बहुत ही अच्छा बनाए जिससे कोई भी विजिटर उसे पढ़े तो उसे जल्द से जल्द आपके टाइटल पर क्लिक कर दे इससे आपका सी टी अर भी इनक्रीस होगा।

4. कैसे बनायें अच्छे टाइटल टैग: अपने टाइटल में 65 वर्ड से ज्यादा वर्ड्स का इस्तमाल न करें क्यूंकि गूगल 65 वर्ड्स के बाद गूगल सेर्चेस में टाइटल टैग शो नही करता है।

5. पोस्ट का यूआरएल कैसे लिखें: हमेशा अपने पोस्ट का यूआरएल आप जितना सिंपल और छोटा हो सके उतना रखें।

6. इंटरनल लिंक: ये अपने पोस्ट को रैंक करने के लिए एक बेहतरीन तरीका है। इससे आप अपने रिलेटेड पेजेज को एक दुसरे के साथ इंटरलिंकेड कर सकते हैं। इससे आपके सभी इंटरलिंकेड पेजेज आसानी से रैंक हो सकते हैं।

7. ऑल्ट टैग: अपने वेबसाइट के पोस्ट में इमेजेज का इस्तमाल जरुर करें। क्यूंकि इमेजेज से आप बहुत सारा ट्रैफिक पा सकते हैं इसलिए इमेज को इस्तमाल करते समय उसमें ऑल्ट टैग लगाना ना भूले।

8. कंटेंट, हैडिंग और कीवर्ड: कंटेंट के बारे में जैसे की हम सभी जानते हैं की ये बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी है। क्यूंकि कंटेंट को किंग भी कहाँ जाता है और जितनी अच्छी आपकी कंटेंट होगी उतने अच्छे साइट की वैल्यूएशन होगी। इसलिए कम से कम 800 वर्ड्स से ज्यादा वर्ड्स के कंटेंट लिखें।

  • इससे आप पूरी जानकारी भी दे सकते हैं और ये एसईओ के लिए भी अच्छा है। कभी भी किसी दुसरे से कंटेंट न चुराएँ या कॉपी करें।

9. हैडिंग: अपने आर्टिकल के हेडिंग्स का ख़ास ख्याल रखना चाहिए, क्यूंकि इससे एसईओ पर काफी इम्पैक्ट पड़ता है। आर्टिकल का टाइटल तो H1 होता है। और इसके बाद के सब हेडिंग्स को आप H2, H3 इत्यादि से नामांकित कर सकते हैं। इसके साथ आप फोकस कीवर्ड का जरुर इस्तमाल करे।

10. कीवर्ड: आप आर्टिकल लिखते समय लसि कीवर्ड का इस्तमाल करें। इससे आप लोगों के सर्चेस को आसानी से लिंक कर सकते हैं। इसके साथ इम्पोर्टेन्ट कीवर्ड्स को बोल्ड करें। जिससे की गूगल और विसिटोर्स को ये पता चले की ये जरुरी कीवर्ड्स हैं और उनका ध्यान इसके तरफ आकर्षित होगा।

यह थे कुछ पॉइंट ओने-पेज एसईओ के बारे में कुछ जानकरी।

2. ऑफ-पेज एसईओ:

ऑफ पेज एसईओ का सारा काम ब्लॉग के बाहार होता है। ऑफ पेज एसईओ में हमे अपने ब्लॉग का प्रमोशन करना होता है जैसे बहुत से पॉपुलर ब्लॉग में जाकर उनके आर्टिकल पर कमेंट करना और अपने वेबसाइट का लिंक सबमिट करना। इसे हम बैकलिंक कहते हैं। बैकलिंक से वेबसाइट को बहुत फायेदा होता है।

सोशल नेटवर्किंग साइट जैसे: फेसबुक, ट्विटर, क्वोरा पर अपने वेबसाइट का अट्रैक्टिव पेज बनाइये और अपने फोल्लोवेर्स बढाइये, इससे आपके वेबसाइट में ज्यादा विसिटोर्स बढ़ने के चान्सेस होते हैं।

बड़े-बड़े ब्लोग्स में जो बहुत ही मसहुर हैं उनके ब्लॉग पर गेस्ट पोस्ट सबमिट करीए, इससे उनके ब्लॉग पे आने वाले विसिटोर्स आपको जानने लगेंगे, और आपके वेबसाइट पर ट्रैफिक आना शुरू हो जायेगा।

ऑफ-पेज एसईओ कैसे करे: यहाँ पर में आप लोगों को कुछ ऑफ पेज एसईओ टेक्निक्स के बारे में बताऊंगा, जो की आपके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा आगे चलकर।

  1. सर्च इंजन सबमिशन: अपनी वेबसाइट को सही तरीके से सारे सर्च इंजन में सबमिट करना चाहिए।
  2. बुकमार्किंग: अपनी ब्लॉग या वेबसाइट के पेज और पोस्ट को बुकमार्किंग वाली वेबसाइट में सबमिट करना चाहिए।
  3. डायरेक्टरी सबमिशन: अपनी ब्लॉग या वेबसाइट को पॉपुलर हाई पीअर वाली डायरेक्टरी में सबमिट करना चाहिए।
  4. सोशल मीडिया: अपनी ब्लॉग या वेबसाइट का पेज और सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाना चाहिए, और अपनी वेबसाइट का लिंक एड कर दो लिखे फेसबुक, गूगल प्लस, ट्विटर, लिंकेडीन।
  5. क्लासिफाइड सबमिशन: फ्री क्लासिफाइड वेबसाइट में जाकर अपनी वेबसाइट का फ्री मे एडवेर्टीजमेंट करना चाहिए।
  6. क्यू एंड ना साइट: आप क्वेश्चन एंड आंसर वाली वेबसाइट में जाकर कोई भी क्वेश्चन कर सकते हो, और अपनी साईट का लिंक लगा सकते हैं।
  7. ब्लॉग कमेंटिंग: अपने ब्लॉग से रिलेटेड ब्लॉग पर जाकर उनके पोस्ट में कमेंट कर सकते हैं, और अपनी वेबसाइट का लिंक लगा सकते हो (लिंक वही लगाना चाहिए जहाँ वेबसाइट लिखा होता है)
  8. पिन: आप अपनी वेबसाइट के इमेज को पिनटेरेस्ट पर पोस्ट कर सकते हैं यह एक बहुत अच्छा तरीका है ट्रैफिक इनक्रीस करने का।
  9. गेस्ट पोस्ट: आप अपनी वेबसाइट से रिलेटेड ब्लॉग पर जाकर गेस्ट पोस्ट कर सकते हैं यह सबसे अच्छा वे है जहाँ से आप डू-फॉलो लिंक ले सकते हैं और वो भी बिलकुल सही तरीके से।

इसे भी पढ़े: गूगल जॉब सर्च क्या है और इसमें जॉब कैसे खोजें?

3. लोकल एसईओ:

अक्सर लोग यह पूछते है की लोकल एसईओ क्या होता है? मेरी मानें तो इसका जवाब वहीँ इसके सवाल में ही छुपा हुआ है।

लोकल एसईओ को अगर विसलेसन करें तब ये दो शब्दों का समाहार है लोकल प्लस एसईओ। यानि की किसी लोकल ऑडियंस को ध्यान में रखकर किया जाने वाला एसईओ को लोकल एसईओ कहा जाता है।

यह एक ऐसे तकनीक है जिसमें की आपकी वेबसाइट या ब्लॉग को ख़ास तोर से ऑप्टिमाइज़ किया जाता है। जिससे की सर्च इंजन पर बेहतर रैंक करे। एक लोकल ऑडियंस के लिए।

वैसे एक वेबसाइट की मदद से आप पुरे इंटरनेट को टारगेट कर सकते हैं, वही अगर आपको एक पतिकुलर लोकैलिटी को ही टारगेट करना है तब इसके लिए आपको लोकल एसईओ का इस्तमाल करना होगा।

इसमें आपको ऑप्टिमाइज़ करना होगा, आपके शहर के नाम, वही इसके एड्रेस डिटेल्स को भी साथ में ऑप्टिमाइज़ करना होगा। वही इसे संक्ष्यिप्त में कहें तब आपको कुछ ऐसे तरीके से अपने साइट को ऑप्टिमाइज़ करना होगा, जिससे की लोगों को केवल ऑनलाइन ही नहीं बल्कि ऑफलाइन में भी आपको जान सकें।

लोकल एसईओ का उदहारण: अगर आपके पास एक लोकल बिज़नेस हो, जैसे की एक दुकान, जहाँ की लोगों का आपके यहाँ अक्सर जाना आना हो, तब ऐसे में यदि आप अपने वेबसाइट को ऑप्टिमाइज़ करते हैं कुछ ऐसे की जिससे रियल लाइफ में भी लोग आपके पास आसानी से पहुँच सके।

यदि यहाँ पर आप केवल अपने ही किसी लोकल एरिया को ही टारगेट करते हैं और उसी हिसाब से आपके साइट को एसईओ ऑप्टीमाइज़्ड करते हैं। तब इस प्रकार के एसईओ को “लोकल एसईओ” कहाँ जाता है।

एसईओ और इंटरनेट मार्केटिंग में डिफ़्फेरन्स क्या है:

बहुत से लोगों में एसईओ और इंटरनेट मार्केटिंग को लेकर बहुत डॉब्टस होते हैं। उन्हें लगता है की ये दोनों प्राय समान हैं। लेकिन इसके जवाब में मैं ये कहना चाहता हूँ की एसईओ एक प्रकार का टूल हैं ये इसे इंटरनेट मार्केटिंग का एक हिस्सा भी कहा सकते हैं। इसके इस्तमाल से इंटरनेट मार्केटिंग को कर पाना बहुत ही आसान हो जाता है।

एसईओ और असईऍम में क्या अंतर है:

एसईओऔर असईऍम में जो मुख्य अंतर है वो ये की एसईओ एक महत्वपूर्ण हिस्सा है असईऍम का। चलिए दोनों एसईओ और असईऍम के विषय में जानते हैं।

एसईओ या सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन एक प्रोसेस है, जिसके द्वारा एक ब्लॉगर अपने ब्लॉग या वेबसाइट को कुछ इसप्रकार से ऑप्टिमाइज़ करता है की जिससे वो ब्लॉग के आर्टिकल्स को सर्च इंजन में रैंक कर सकें। और वहां से अपने ब्लॉग पर फ्री ट्रैफिक ला सके।

असईऍम या सर्च इंजन मार्केटिंग एक मार्केटिंग प्रोसेस है जिसके द्वारा आप अपने ब्लॉग को सर्च इंजिन्स में ज्यादा विज़िबल बना सकते हो जिससे आपको ट्रैफिक आये चाहे वो फ्री ट्रैफिक (एसईओ) हो या फिर पैड ट्रैफिक (पैड सर्च अद्वेर्तिसेमेन्ट).

एसईओ का मुख्य उद्देश्य है की आपका ब्लॉग/वेबसाइट ठीक ढंग से ऑप्टिमाइज़ हो सके, ताकि सर्च इंजन में बेटर रैंकिंग प्राप्त कर सके। वही असईऍम से आप असईऍम की तुलना में ज्यादा चीज़ प्राप्त कर सकते हैं। क्यूंकि ये केवल फ्री ट्रैफिक तक ही सिमित नहीं है बल्कि इसमें दुसरे मेथड्स भी शामिल हैं जैसे की: पी पी सी एडवरटाइजिंग इत्यादि।

एसईओ के बारे में जानकारी:

यदि आपका कोई ब्लॉग है या कोई वेबसाइट है। तब तो आपको बेसिक एसईओ के बारे में बहुत कुछ पता होगा की ये कैसे काम करता है। लेकिन मुझे पता हैं आप में से ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिन्हें की बेसिक एसईओ के बारे में भी कुछ जानकारी नहीं है।

इसलिए मैंने सोचा की क्यूँ न, आप लोगों को कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण एसईओ टर्म्स के बारे में जानकारी दे दी जाये, जिससे की आपको भी इसके बारे में पता चल सके।

  1. बैकलिंक: इसके इंलिंक या सिम्पली लिंक भी कहाँ जाता है, ये एक हाइपरलिंक होता है, किसी दुसरे वेबसाइट में जो की आपके वेबसाइट के तरफ इशारा करता है। बैकलिंक्स एसईओ के नज़रिए से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, क्यूंकि ये किसी भी वेबपेज की सर्च रैंकिंग को डायरेक्टली इन्फ्लुएंस करता है।
  2. पेज रैंक: पेज रैंक एक अल्गोरिथम है, जिसे की गूगल इस्तमाल करता है, ये अनुमान लगाने लिए की वेब में कौन-कौन सी रिलेटिव इम्पोर्टेन्ट पेजेज स्तिथ हैं।
  3. एंकर टेक्स्ट: किसी भी बैकलिंक का एंकर टेक्स्ट के प्रकार का टेक्स्ट होता है जो की क्लिककब्ले होता है। यदि आपके एंकर टेक्स्ट में आपका कीवर्ड मेह्जुद है तब तो ये आपको एसईओ के दृष्टी से भी काफी मदद करेगा।
  4. टाइटल टैग: टाइटल टैग मुख्य रूप से किसी भी वेब पेज का टाइटल होता है और ये बहुत ही महत्वपूर्ण फैक्टर है। गूगल सर्च अल्गोरिथम के लिए।
  5. मेटा टैग: टाइटल टैग के जैसे ही मेटा टैग का इस्तमाल से सर्च इंजिन्स को ये पता चलता है की पेजेज में कंटेंट में क्या स्तिथ है।
  6. सर्च अल्गोरिथम: गूगल’स सर्च अल्गोरिथम की मदद से हम ये पता कर सकते हैं की पुरे इंटरनेट में कौन सी वेब पेजेज रिलेवेंट हैं। लगभग 200 अल्गोरिथ्म्स काम करती हैं गूगल के सर्च अल्गोरिथम में।
  7. असइअरपी: इसके फुल फॉर्म हैं सर्च इंजन रिजल्ट्स पेज। ये बसीकली उन्ही पेजेज को दिखाया करता है जो की गूगल सर्च इंजिन्स के हिसाब से रिलेवेंट हों।
  8. कीवर्ड डेंसिटी: ये कीवर्ड डेंसिटी से ये पता चलता है की कितनी बार कोई भी कीवर्ड आर्टिकल में कितनी बार इस्तमाल की गयी हैं। कीवर्ड डेंसिटी एसईओ की दृष्टी से काफी महत्वपूर्ण है।
  9. कीवर्ड स्तुफ्फिंग: जैसे की मैंने पहले ही कहा की कीवर्ड डेंसिटी एसईओ की दृष्टी से काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन अगर कोई कीवर्ड को जरुरत से ज्यादा इस्तमाल किया जाये तो, उसे कीवर्ड स्तुफ्फिंग कहते हैं। ये नेगेटिव एसईओ कहलाता हैं क्यूंकि इससे आपके ब्लॉग पर ख़राब असर पड़ता है।
  10. रोबोट्स.टस्ट: ये ज्यादा कुछ नहीं बस एक फाइल होती है, जिसे की डोमेन के रुट में रखा जाता है। इसके इस्तमाल से सर्च बोट्स को ये सूचित किया जाता है की वेबसाइट की स्ट्रक्चर कैसी है।

इसे भी पढ़े: गूगल क्या है ये किसने बनाया और किस-किस काम में आता है?

आर्गेनिक और इनऑर्गेनिक रिजल्ट्स क्या होते हैं:

असईअरपी (सर्च इंजन रिजल्ट पेज) पर मुख्य रूप ऐ दो तरह की लिस्टिंग्स होती हैं – आर्गेनिक और इनऑर्गेनिक।

इसमें इनऑर्गेनिक लिस्टिंग के लिया, हमें गूगल को पैसे देने होते है। यानि के ये पैड होते हैं और इसमें पैसों का भुक्तान करना पड़ता है।

वही आर्गेनिक लिस्टिंग पूरी तरह से फ्री होती है यानि की बिना पैसे दिये हम गूगल के टॉप पेज पर भी आ सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले आपको एसईओ करना होता है।

एसईओ हिंदी में:

आप सब समझ ही गए होंगे के एसईओ क्या है (व्हाट इस एसईओ इन हिंदी) यदि आपके मन में इस आर्टिकल को लेकर कोई भी डॉब्टस हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीच कमैंट्स लिख सकते हैं।

आसानी से अब आप एसईओ क्या होता है का जवाब बेझिझक दे सकते हैं। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

यदि आपको मेरी यह लेख सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की जानकारी हिंदी में अच्छा लगा हो या इससे आपको कुछ सिखने को मिला हो तब अपनी प्रसन्नता और उत्त्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को सोशल नेटवर्क्स जैसे कि: फेसबुक, ट्विटर इत्यादि पर शेयर कीजिये।

ये थी एसईओ से जुडी जानकारी अगर आप एसईओ के बेसिक टर्म्स और उनके मतलब जानना चाहते हैं, तो आप “बेसिक एसईओ टर्म्स और उनके मैनिंग्स” ये आर्टिकल आप 24Hindi.in से पढ़ सकते हैं।

Sagar Biswashttps://24hindi.in
Sagar Biswas is the Chief Seo Expert and the Founder of ‘24Hindi’. He has a very deep interest in all current affairs topics whatsoever. Well, he is the power of our team and he lives in Surat. Who loves to be a self dependent person.

Similar Articles

Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Unlimited

Insurance – इन्शुरन्स क्या है और यह कितने तरह का होता है पूरी जानकारी हिन्दी में।

हेलो दोस्तों आप सभी का "24Hindi" आपका स्वागत है आज इस आर्टिकल में हम बात करेंगे की इन्शुरन्स क्या है और यह कितने तरह...

Insurance – इन्शुरन्स क्या होता हैं? जाने इन्शुरन्स कितने प्रकार के होते हैं और इन्शुरन्स करवाने के फायदे।

इन्शुरन्स यानी कि बीमा क्या होता हैं? इन्शुरन्स कितने प्रकार के होते हैं? अथवा इन्शुरन्स कराने से हमें क्या लाभ मिलता हैं? ऐसे कई...

Most Popular

Hardum Humdum Song Lyrics – हरदम हमदम गाने की लिरिक्स डाउनलोड करें हिंदी में

हरदम हमदम गाने की लिरिक्स: अरिजीत सिंह द्वारा गाया गए फिल्म लूडो से हिंदी में हरदम हमदम गीत। इस गीत को सईद क्वाडरी ने...

Taare Balliye Song Lyrics – तारे बल्लिये गाने की लिरिक्स डाउनलोड करें हिंदी में

तारे बल्लिये सांग लिरिक्स: हिन्दी में तारे बल्लिये गीत, अम्मी विर्क द्वारा गाया गया। यह पंजाबी गीत हैप्पी रायकोटी द्वारा लिखा गया है और...